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Saturday, December 22, 2012

दिल्ली की सडकें लाल हैं आज

बलात्कारियों को मिले होंगे कम्बल, कसाब को देते थे बिरयानी,
पर आम आदमी पे बरसाए गए आंसूगैस, लाठियाँ और पानी,
अरे मेरे देश के कानून, तुम मजबूर हो फिर हैं ये तेरी मनमानी,
जाग गया है देश, रक्तरंजित हैं सड़कें, इंशाल्लाह खत्म होगी ये कहानी

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